Urea Gold Fertilizer 2023 : पीएम मोदी ने लांच की एक नई खाद, मिट्टी को होगा बड़ा लाभ ,

Urea Gold Fertilizer 2023: पीएम मोदी ने लांच की नई खाद, मिट्टी को होगा फायदा, बढ़ जाएगा उत्पादन, सरकार से अतिरिक्त सब्सिडी भी मिलेगी Urea Gold Fertilizer 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के किसानों के लिए नई खाद Urea Gold Fertilizer 2023 लांच कर दी है। यह खाद मिट्टी को फायदा पहुंचाएगी। इससे किसानों का उत्पादन बढ़ेगा।सरकार इस खाद को खरीदने के लिए अतिरिक्त सब्सिडी भी उपलब्ध कर रही है। सल्फर लेपित यूरिया, जिसे यूरिया गोल्ड (Urea Gold Fertilizer 2023) के नाम से जाना जाता है, के इस्तेमाल से मिट्टी में सल्फर की कमी दूर हो जाएगी। यह नया उर्वरक नीम-लेपित यूरिया की तुलना में अधिक किफायती और कारगर है, जो नाइट्रोजन के उपयोग से संबंधित उन्नत दक्षता, कम खपत और फसल की उन्नत गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।

Urea Gold Fertilizer 2023
Urea Gold Fertilizer 2023

किसानों को होगा बड़ा फायदा

यूरिया गोल्ड यूरिया की एक नई किस्म है जो सल्फर लेपित है और इसके इस्तेमाल से मिट्टी में सल्फर की कमी दूर किया जा सकेगा। सल्फर कोटेड यूरिया कम सल्फर वाली मिट्टी के लिए वरदान साबित होगी। अभी तक प्राप्त जानकारी के मुताबिक किसानों को इसे कम दाम पर मुहैया करवाने के लिए सरकार द्वारा इस पर अतिरिक्त सब्सिडी भी देगी। जो की इसे बनाने वाली कंपनियों को मिलेगी।

खेती के लिए क्यों आबश्यक है सल्फर कोटिंग

भारतीय कृष‍ि अनुसंधान संस्थान, पूसा के वैज्ञान‍िकों ने फरवरी में ही सरकार को इसके बारे में नोटिस द‍िया था अथवा जुलाई में इसकी शुरु कर दी गई। उन्होंने सरकार को बताया था कि सल्फर कोटिंग खेती के लिए कितना जरूरी है। बता दें कि नीम कोटेड यूरिया के संबंध में पूसा का रिसर्च पेपर 1971 में ही आ गया था, लेकिन इसकी शुरुआत 2015 में की गई। जबकि सल्फर कोडिंग को लेकर सरकार ने जल्दबाजी दिखाई, क्योंकि धरती की सेहत को ठीक करना जरूरी था। आने वाले समय में जिंक अथबा वॉरेन कोटेड यूरिया भी लाई जाएगी, क्योंक‍ि इन दोनों तत्वों की भी भूमि में भारी कमी है।

सल्‍फर कोटेड यूरिया की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

मृदा में सल्‍फर की कमी को दूर करने अथवा किसानों की इनपुट लागत को कम करने के लिए सल्‍फर कोटेड यूरिया (यूरिया गोल्ड) की शुरु की गई।
उर्वरक की दीर्घायु बढ़ने के लिए यूरिया में ह्यूमिक एसिड मिलाया गया है। यह यूरिया की खपत को कम करेगा एवं उर्वरक के उपयोग को भी कम करेगा।
ऐसा कहा जाता है कि 15 किलोग्राम यूरिया गोल्ड अथबा 20 किलोग्राम पारंपरिक यूरिया के बराबर है। सल्फर लेपित यूरिया के हुए विचलन को रोकता है।
यह यूरिया की एक नई तकनीक है, जो सल्फर से लेपित होगी। सल्फर लेपित यूरिया की शुरुआत से मिट्टी में सल्फर की कमी की समस्या का खत्मा होगा।
यह नवोन्मेषी उर्वरक, नीम-लेपित यूरिया की तुलना में ज्यादा किफायती एवं प्रभावी है, पौधों में नाइट्रोजन उपयोग की दक्षता में सुधार करता है, उर्वरक की खपत कम करता है और फसल की गुणवत्ता बढ़ाता है।
सल्‍फर कोटेड यूरिया नाइट्रोजन को धीमी गति से जारी करने में मदद करता है, जिससे इसकी उपलब्‍धता और उपभोग बढ़ जाता है।

ONDC पर शामिल 1600 FPO का शुभारंभ

अगले पांच सालों के अनुसार 10,000 नए FPO स्थापित करने के लिए 6,865 करोड़ रुपये के लगभग बजट के साथ एफपीओ सम्बंधित इस पहल की शुरुआत फरवरी 2020 में कराइ गई थी। आज तक 6,319 एफपीओ पंजीकृत किए गए हैं (188.3 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी अथबा 11.96 लाख किसान)। ओएनडीसी (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) 1600 किसान भाई उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को शामिल किए जाने का साक्षी बना। ओएनडीसी डिजिटल मार्केटिंग तक सीधी पहुंच, ऑनलाइन भुगतान, बी2बी और बी2सी लेनदेन की सुविधा के साथ एफपीओ को सशक्त बनाता है एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स के विकास को उत्प्रेरित करते हुए स्थानीय मूल्यवर्धन को उत्साहित करता है।

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